3000 KM और एक लॉग राइड के बाद Suzuki V-Strom SX Review: क्या मुझे अपनी बाइक खरीदने का पछतावा है?

Author: Ankit Namdev

गंगोत्री की यात्रा के बाद समझ आया कि V-Strom SX की असली ताकत क्या है

Handlebar Risers in suzuki v strome

पिछले कुछ वर्षों में भारत में एडवेंचर टूरिंग बाइक्स की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। Hero Xpulse 200 4V, Royal Enfield Himalayan 450 और KTM Adventure जैसे भारी-भरकम बाइक्स के बीच Suzuki V-Strom SX भी मजबूती से खड़ी है। 

सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस बाइक की चर्चा अक्सर बाकी मॉडलों जितनी नहीं होती, लेकिन सड़क पर इसे चलाने का असली व्यावहारिक अनुभव कुछ अलग ही कहानी बयां करता है।

करीब 3000 किलोमीटर तक इसे अलग-अलग परिस्थितियों में चलाने के बाद मेरी राय भी पहले जैसी नहीं रही। इस दौरान रोज़ का भारी सिटी ट्रैफिक मिला, खुले हाईवे मिले, गाँवों की टूटी-फूटी सड़कें मिलीं और सबसे यादगार रही दिल्ली से गंगोत्री की लंबी यात्रा। यह रिव्यू किसी स्पेसिफिकेशन शीट या कंपनी के दावों पर आधारित नहीं है। इसमें सिर्फ वही बातें हैं जो मैंने खुद एक ओनर के तौर पर महसूस की हैं-इसकी खूबियाँ भी और कुछ बारीक कमियाँ भी।

राइड एक नज़र में (Ride Snapshot)

विवरणजानकारी
रिव्यूअरअंकित नामदेव
बाइकSuzuki V-Strom SX (250cc)
कुल रनिंग3000+ किलोमीटर
सबसे लंबी यात्रादिल्ली से गंगोत्री (करीब 962 KM)
वास्तविक माइलेज33 – 35 किमी/लीटर
अनुमानित ऑन-रोड कीमत₹2.50 – ₹2.60 लाख

पहली बार बाइक देखी तो सबसे पहले यही बात ध्यान में आई

पहली बार V-Strom SX को सामने से देखने पर इसका आकार उम्मीद से काफी बड़ा लगा। अगर कोई नया व्यक्ति इसे पहली नज़र में 400-500 CC की मोटरसाइकिल समझ ले, तो मुझे ज़रा भी हैरानी नहीं होगी। इसका ऊँचा फ्रंट, एडवेंचर स्टाइल की विंडस्क्रीन और लंबा स्टांस इसे सड़क पर एक ज़बरदस्त रोड प्रेजेंस देते हैं। यही वजह रही कि शुरुआती दिनों में कई लोगों ने मुझसे एक ही सवाल पूछा-“भाई, ये बाइक काफी ऊँची लग रही है… संभालने में दिक्कत तो नहीं होती?”

मेरी लंबाई लगभग 5 फीट 11 इंच है, इसलिए मुझे इसे संभालने या ट्रैफिक में रोकने में कोई खास परेशानी नहीं हुई। लेकिन अगर आपकी लंबाई लगभग 5 फीट 6 या 5 फीट 7 इंच के आस-पास है, तो शुरुआत में पार्किंग से पीछे निकालते समय या ढलान पर पैर टिकाने में थोड़ा ध्यान देना पड़ सकता है। हालाँकि, कुछ दिन लगातार चलाने के बाद इसकी आदत हो जाती है।

ऊँची सीट का एक बड़ा फायदा भी है

इस ऊँचाई का असली फायदा मुझे तब समझ आया जब गंगोत्री जाते समय कई जगह बेहद खराब रास्ते मिले। कुछ जगह सड़क पर बड़े-बड़े पत्थर थे, कहीं ऊँचे स्पीड ब्रेकर थे, तो कई जगह सड़क का नामोनिशान नहीं था। इन मुश्किल परिस्थितियों में भी मुझे कभी ऐसा डर नहीं लगा कि बाइक नीचे से टकरा जाएगी। करीब 3000 किलोमीटर के इस सफर में इसके शानदार ग्राउंड क्लीयरेंस की वजह से मुझे एक भी बार ‘नीचे लगने’ (Underbelly Scraping) की समस्या नहीं हुई।

सीट ने शुरुआत में थोड़ा परेशान किया (और मेरा छोटा सा जुगाड़)

हर चीज़ पहली बार में परफेक्ट नहीं होती। शुरुआत में मुझे इसकी सीट के साथ एक छोटी सी व्यावहारिक परेशानी महसूस हुई। लंबी राइड के दौरान राइडर का शरीर धीरे-धीरे आगे की तरफ खिसकने लगता था। पहले मुझे लगा शायद मेरे बैठने का तरीका गलत है, लेकिन कुछ और राइड्स के बाद समझ आया कि सीट की ढलान ही थोड़ी अलग है। इसके बाद मैंने सीट में थोड़ा बदलाव करवाने का फैसला किया।

मैंने सीट में थोड़ा एक्स्ट्रा फोम डलवाया और उसकी शेप को अपने बैठने के कम्फर्ट के अनुसार मॉडिफाई करवा लिया। मॉडिफिकेशन का खर्च बहुत ज्यादा नहीं आया, लेकिन इसका फायदा उम्मीद से कहीं ज्यादा मिला। गंगोत्री यात्रा के दौरान कई घंटे लगातार बाइक चलाने के बाद भी कमर या जांघों में कोई थकान महसूस नहीं हुई।

पीछे बैठने वाले (Pillion) का अनुभव कैसा रहा?

इस बाइक पर मेरी मम्मी भी कई बार पीछे बैठीं। हर बार बाइक पर बैठने से पहले उनका पहला रिएक्शन यही होता था कि बाइक बहुत ऊँची है और इस पर चढ़ना आसान नहीं है। लेकिन एक बार सीट पर बैठने के बाद उनकी शिकायत खत्म हो जाती थी। सीट काफी चौड़ी है और पीछे बैठने वाले को बेहतरीन सपोर्ट देती है। लंबी दूरी पर भी उन्होंने कम्फर्ट को लेकर कभी कोई शिकायत नहीं की।

हैंडलबार राइजर्स लगाने के बाद सबसे बड़ा बदलाव महसूस हुआ

कंपनी से मिलने वाला स्टॉक हैंडलबार मेरे हिसाब से थोड़ा नीचे की तरफ सेट था। शहर में तो इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता था, लेकिन लंबी दूरी तय करने के बाद कंधों पर हल्का दबाव महसूस होने लगता था। इस समस्या को दूर करने के लिए मैंने इसमें लगभग 1.5 इंच के हैंडलबार राइजर्स (Handlebar Risers) लगवाए।

इसका फर्क पहले दिन से ही साफ महसूस हुआ। राइडिंग पोज़िशन अब ज्यादा सीधी (Upright) हो गई और कंधों का तनाव पूरी तरह खत्म हो गया। अब मैं लगभग 100 से 150 किलोमीटर लगातार बिना किसी ब्रेक के आसानी से चला लेता हूँ। अगर आपकी प्राथमिकता भी लॉन्ग-डिस्टेंस टूरिंग है, तो यह इस बाइक के लिए सबसे उपयोगी मॉडिफिकेशन साबित होगा।

इंजन ने मुझे सबसे ज़्यादा प्रभावित किया

Suzuki V-Strom SX engine performance

अगर इस बाइक की सिर्फ एक सबसे बड़ी ताकत चुननी हो, तो मैं बिना सोचे इसके इंजन का नाम लूँगा। सुजुकी का यह 249cc का ऑयल-कूल्ड इंजन पहली ही राइड से बेहद रिफाइंड और स्मूद महसूस होता है। शहर में कम स्पीड पर चलाते समय भी यह झटके नहीं देता और हाईवे पर पहुंचते ही आराम से रफ्तार पकड़ लेता है।

सबसे अच्छी बात यह लगी कि 90 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार पर भी इसकी आवाज़ बिल्कुल शांत रहती है और इंजन पर कोई दबाव महसूस नहीं होता। थ्रॉटल पर हल्का सा इनपुट देते ही बाइक बिना किसी हिचकिचाहट के आगे बढ़ती है। गंगोत्री की यात्रा के दौरान मुझे समझ आया कि लोग सुजुकी के इंजन रिफाइनमेंट की इतनी तारीफ क्यों करते हैं; लगातार कई घंटे चलाने के बाद भी इंजन का व्यवहार बिल्कुल वैसा ही स्मूद था जैसा सुबह स्टार्ट करते समय था। हाँ, लगभग 103 से 105 किमी/घंटा के बाद फुटपेग्स पर हल्के वाइब्रेशन महसूस होते हैं, लेकिन वे इतने कम हैं कि पूरी राइड का मजा खराब नहीं करते।

गंगोत्री ट्रिप में माइलेज ने भी चौंकाया

250cc की बाइक खरीदते समय मेरे मन में सबसे बड़ा सवाल यही था कि लंबी यात्राओं में जेब पर कितना असर पड़ेगा। इसका जवाब मुझे गंगोत्री ट्रिप के बाद मिल गया। करीब 962 किलोमीटर की इस यात्रा में हाईवे, कठिन पहाड़ी रास्ते, शहर का ट्रैफिक और छोटे कस्बों की सड़कें-सब कुछ शामिल था।

V-Strom SX mileage

यह माइलेज इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर की रीडिंग और ट्रिप के दौरान किए गए मेरे अपने फ्यूल कैलकुलेशन पर आधारित है। 

इस पूरी यात्रा में मेरा लगभग ₹2500 का पेट्रोल लगा। उस हिसाब से बाइक ने आराम से 33 से 35 किमी/लीटर (kmpl) का माइलेज दिया, जो कि एक 250cc एडवेंचर बाइक के लिए बेहतरीन आंकड़ा है। एक और अच्छी बात मैंने नोटिस की कि इसका माइलेज सिर्फ हाईवे पर ही नहीं, बल्कि मिक्स्ड राइडिंग में भी ज्यादा नीचे नहीं गिरता।

छोटी विंडस्क्रीन… लेकिन उम्मीद से बेहतर काम

Suzuki V-Strom SX wind sheld

बाइक खरीदने से पहले मुझे इसकी विंडस्क्रीन देखकर लगा था कि यह सिर्फ दिखावे के लिए है। लेकिन हाईवे पर 95-100 किमी/घंटा की स्पीड पर चलते ही मेरी राय बदल गई। मेरी लंबाई 5 फीट 11 इंच है, और हवा का दबाव मुख्य रूप से मेरे हेलमेट के ऊपरी हिस्से तक ही सीमित रहा, जिससे छाती और गर्दन पर विंड ब्लास्ट बहुत कम महसूस हुआ।

ब्रेकिंग ने पूरा भरोसा दिया

इसमें डुअल-चैनल ABS मिलता है और रोजमर्रा की राइडिंग में इसकी ब्रेकिंग काफी संतुलित लगी। फ्रंट ब्रेक का रिस्पॉन्स बहुत अच्छा है और इसकी शुरुआती बाइट पूरा भरोसा देती है। रियर ब्रेक भी अपना काम ठीक-ठाक करता है, लेकिन अगर उसका फीडबैक थोड़ा और शार्प होता तो बेहतर रहता। फिर भी, सुरक्षा के लिहाज से ब्रेकिंग पर संदेह करने की कोई गुंजाइश नहीं है।

3000 KM बाद जो कमियाँ सामने आईं (Cons)

Braking Performance Suzuki V-Strom SX

कोई भी बाइक पूरी तरह परफेक्ट नहीं होती और V-Strom SX में भी कुछ ऐसी कमियां हैं जिन्हें आपको ध्यान में रखना चाहिए:

  1. हार्ड फ्रंट सस्पेंशन (Stiff Suspension): हाईवे पर तो यह शानदार काम करता है, लेकिन टूटी सड़क या छोटे-छोटे गड्ढों पर झटके सीधे आपके हाथों और हैंडल तक महसूस होते हैं। यह खराब रास्तों पर कम्फर्ट के मामले में उतनी सॉफ्ट नहीं है जितनी Himalayan या Xpulse होती हैं।
  2. औसत हेडलाइट ब्राइटनेस: इसकी एलईडी हेडलाइट रोजमर्रा की शहरी राइडिंग के लिए तो ठीक है, लेकिन रात में बिना स्ट्रीट लाइट वाले हाईवे पर रोशनी थोड़ी कम लगती है। इसी वजह से मैंने बाद में अपनी बाइक पर Auxiliary फॉग लाइट्स लगवा लीं।
  3. साधारण मीटर कंसोल: आज के समय में जब कई बाइकों में शानदार TFT डिस्प्ले मिलने लगा है, इसका एलसीडी कंसोल थोड़ा साधारण या पुराना लगता है। हालांकि, व्यावहारिक रूप से इसमें लाइव माइलेज, बैटरी वोल्टेज, ट्रिप मीटर और टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन जैसी सभी जरूरी जानकारी मिल जाती है।

तो क्या मुझे Suzuki V-Strom SX खरीदने का पछतावा है?

इसका सीधा और साफ जवाब है- बिल्कुल नहीं!

सस्पेंशन का थोड़ा हार्ड होना या हेडलाइट का थोड़ा कमजोर होना जैसी कुछ कमियां इस बाइक में जरूर हैं, लेकिन इन कमियों के बावजूद इस मोटरसाइकिल ने मुझे कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि मैंने कोई गलत फैसला लिया है। इसका बेहद रिफाइंड इंजन, बजट-फ्रेंडली मेंटेनेंस और हर परिस्थिति में साथ देने का स्वभाव इन छोटी-मोटी कमियों पर भारी पड़ता है।

Autobaba Verdict

3000 KM Aur Ek Long Ride Ke Baad Suzuki V-Strom SX Review

3000 किलोमीटर के इस लंबे सफर के बाद मेरी सबसे बड़ी सीख यही रही कि एक बेहतरीन टूरिंग बाइक बनने के लिए सिर्फ कागज़ पर बहुत ज्यादा पावर होना जरूरी नहीं है। एक भरोसेमंद जापानी इंजन, आरामदायक राइडिंग पोज़िशन, अच्छा माइलेज और लंबी दूरी पर मिलने वाला मानसिक सुकून कई बार ज्यादा मायने रखता है।

सीधी बात है-अगर आपका मुख्य उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ कठिन ऑफ-रोडिंग या कच्चे रास्तो पर बाइक को चलाना है तो ऐसे में आपके लिए Hero Xpulse या Himalayan 450 आपके लिए ज्यादा बेहतर विकल्प होंगी। लेकिन, अगर आप एक ऐसी रिलायबल मोटरसाइकिल चाहते हैं जिसे सोमवार को ऑफिस भी ले जा सकें और वीकेंड पर बिना किसी टेंशन के लद्दाख या गंगोत्री की लंबी ट्रिप पर भी निकल सकें-तो Suzuki V-Strom SX आपके लिए एक बेस्ट और पैसा- वसूल पैकेज है।

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