Tata Safari Mountain Test: 1,406 KM के पहाड़ी सफर में टाटा सफारी ने कितना साथ दिया? जानिए पूरा अनुभव

कुछ रोड ट्रिप ऐसी होती हैं जिन्हें मंजिल से ज़्यादा रास्ते याद रहते हैं। मेरठ से बारालाचा ला पास तक का यह सफर भी मेरे लिए बिल्कुल ऐसा ही रहा। इस रूट पर कहीं लंबे एक्सप्रेसवे मिले, कहीं संकरी पहाड़ी सड़कें, कहीं टूटे हुए हिस्से और कई जगह ऐसे नाले भी मिले जिन्हें पार करते समय हर बार थोड़ा संभलकर चलना पड़ा।

ऐसे रास्तों पर किसी भी SUV की असली ताकत पता चलती है। शोरूम में हर गाड़ी अच्छी लगती है, लेकिन जब लगातार कई दिनों तक अलग-अलग तरह की सड़कों पर चलना पड़े, तभी समझ आता है कि वह लंबी दूरी के लिए कितनी भरोसेमंद है।

इस पूरे ट्रिप में हमारी Tata Safari Diesel ने कुल 1,406 किलोमीटर का सफर तय किया। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इतने कठिन रूट के बावजूद पूरे सफर का औसत माइलेज 17.1 किमी/लीटर रहा। सच कहूँ तो ट्रिप खत्म होने के बाद मैंने यह आंकड़ा दोबारा चेक किया, क्योंकि मुझे खुद इस गाड़ी से इतनी अच्छी फ्यूल एफिशिएंसी की उम्मीद नहीं थी।

इस सफर की मुख्य जानकारी 

tata safari Pros & Con
  • कार मॉडल: टाटा सफारी डीजल (Tata Safari Diesel)
  • ओनर: मोहित कुमार
  • रूट: मेरठ → चंडीगढ़ → मनाली → अटल टनल → जिस्पा → बारालाचा ला पास → वापसी
  • कुल दूरी: 1,406 किमी
  • औसत माइलेज: 17.1 किमी/लीटर

मेरठ से चंडीगढ़: सफर की आरामदायक शुरुआत

सुबह जल्दी निकलने का फायदा यह हुआ कि शहर का ट्रैफिक ज़्यादा नहीं मिला। जैसे-जैसे हाईवे खुलता गया, सफारी का हाईवे कैरेक्टर भी सामने आने लगा।

करीब 100-110 किमी/घंटा की स्पीड पर SUV काफी स्थिर महसूस हुई। इसकी शानदार हाईवे स्टेबिलिटी (Stability) की वजह से बार-बार स्टीयरिंग संभालने की ज़रूरत नहीं पड़ रही थी और केबिन के अंदर भी अनचाही हलचल महसूस नहीं हुई। करीब तीन-चार घंटे लगातार ड्राइव करने के बाद पहली बार एहसास हुआ कि सफारी लंबी दूरी की यात्रा के लिए क्यों पसंद की जाती है। पीठ या कंधों पर वैसी थकान नहीं थी, जैसी अक्सर लगातार ड्राइविंग के बाद महसूस होने लगती है।

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चंडीगढ़ से मनाली: जहाँ ड्राइविंग का असली मज़ा शुरू हुआ

चंडीगढ़ के बाद सड़क का मिज़ाज बदल गया। जैसे-जैसे पहाड़ करीब आते गए, वैसे-वैसे मोड़ बढ़ते गए। कुल्लू घाटी की घुमावदार सड़कें और लगातार बदलते मौसम ने ड्राइविंग को पहले से ज्यादा दिलचस्प बना दिया।

ऐसे रास्तों पर सफारी की ऊँची ड्राइविंग पोज़िशन काफी काम आई। आगे का ट्रैफिक साफ दिखाई देता था और ब्लाइंड कर्व्स पर भी आत्मविश्वास बना रहा था। सबसे अच्छी बात यह लगी कि हर मोड़ पर SUV का बैलेंस (Balance) बिल्कुल अनुमान के मुताबिक रहा। स्टीयरिंग में घबराहट नहीं थी और सस्पेंशन खराब रास्तों को काफी आराम से संभाल रहा था।

अटल टनल के बाद शुरू हुई असली परीक्षा

अटल टनल पार करते ही सड़क का रंग-रूप पूरी तरह बदल गया। कहीं चिकनी सड़क, तो कुछ किलोमीटर बाद टूटे हुए हिस्से। कई जगह छोटे-छोटे पानी के नाले और पत्थरों से भरे सेक्शन भी मिले। यहीं पहली बार महसूस हुआ कि अब सफारी की असली परीक्षा शुरू हो चुकी है।

यहाँ इसका बैलेंस कमाल का रहा और 205 मिमी का ग्राउंड क्लीयरेंस कई जगह काम आया। ऐसे सेक्शन भी आए जहाँ लगा कि अगर गाड़ी थोड़ी और नीची होती तो नीचे से टकराने का डर बना रहता। खराब रास्तों पर भी सस्पेंशन ने लगातार अच्छा काम किया। केबिन के अंदर अनावश्यक झटके नहीं आए और पीछे बैठे लोगों ने भी कम्फर्ट को लेकर कोई शिकायत नहीं की।

बारालाचा की चढ़ाई पर इंजन ने कितना साथ दिया?

बारालाचा ला पास समुद्र तल से लगभग 16,000 फीट की भारी ऊँचाई पर है। इतनी ऊँचाई पर ऑक्सीजन कम होने की वजह से इंजन परफॉर्मेंस पर असर पड़ना सामान्य बात है।

लेकिन सफारी का 2.0 लीटर Kryotec डीज़ल इंजन पूरे रास्ते भरोसेमंद लगा। खड़ी चढ़ाइयों पर भी पावर अचानक गायब नहीं हुई। ओवरटेकिंग के समय इंजन ने अनुमान के मुताबिक रिस्पॉन्स दिया और लो-एंड टॉर्क लगातार महसूस होता रहा। यहीं पहली बार लगा कि सफारी सिर्फ शहर में चलने वाली बड़ी SUV नहीं है, पहाड़ों पर भी इसकी स्टेबिलिटी और आत्मविश्वास कम नहीं होता।

17.1 KMPL का माइलेज उम्मीद से बेहतर निकला

17.1 KMPL Mileage in tata safari

अगर किसी ने ट्रिप शुरू होने से पहले मुझसे कहा होता कि इस पूरे पहाड़ी सफर के बाद सफारी 17.1 किमी/लीटर का औसत माइलेज देगी, तो शायद मुझे यकीन नहीं होता। लेकिन ट्रिप खत्म होने के बाद यही आंकड़ा सामने था। इसमें एक्सप्रेसवे भी थे, पहाड़ भी थे, ट्रैफिक भी था और लगातार चढ़ाई भी। अगर आराम से ड्राइव किया जाए और बिना वजह तेज एक्सीलरेशन से बचा जाए, तो सफारी अपने साइज के हिसाब से अच्छी फ्यूल एफिशिएंसी देती है।

हाईवे पर इसका आत्मविश्वास अलग ही महसूस होता है

वापसी के दौरान लंबे हाईवे सेक्शन पर सफारी का प्लांटेड फील बार-बार ध्यान खींचता रहा। तेज़ हवा के झोंकों के बावजूद SUV अपने ट्रैक पर बेहतरीन स्टेबिलिटी के साथ बनी रही। हाई स्पीड पर भी ऐसा नहीं लगा कि गाड़ी हल्की पड़ रही है।

पहाड़ों से नीचे उतरते समय ब्रेकिंग ने भी भरोसा बनाए रखा। लगातार ढलान पर चलने के बावजूद ब्रेक फेड जैसी कोई समस्या महसूस नहीं हुई और हर बार ब्रेक का रिस्पॉन्स एक जैसा रहा, जिससे गाड़ी का ओवरऑल बैलेंस हमेशा कंट्रोल में रहा।

केबिन कम्फर्ट और बूट स्पेस

लंबे सफर में सिर्फ इंजन नहीं, केबिन भी बहुत मायने रखता है। ड्राइवर सीट पर लगातार कई घंटे बिताने के बाद भी थकान उम्मीद से कम रही। पीछे बैठे यात्रियों के लिए भी जगह पर्याप्त थी और सामान रखने के लिए बूट स्पेस में कोई कमी महसूस नहीं हुई। तीन लोगों का पूरा ट्रैवल लगेज आसानी से आ गया। जेबीएल (JBL) म्यूजिक सिस्टम ने लंबे हाईवे सेक्शन को और भी मजेदार बना दिया।

खूबियाँ और कमियाँ (Pros & Cons)

जो बातें सबसे अच्छी लगीं (Pros):

  • शानदार हाईवे स्टेबिलिटी: हाई-स्पीड पर बेहतरीन स्थिरता और प्लांटेड फील मिलता है।
  • कम्फर्टेबल सस्पेंशन: खराब रास्तों और गड्ढों को आसानी से सोखने वाला मैच्योर सेटअप।
  • भरोसेमंद इंजन: पहाड़ों की खड़ी चढ़ाईयों में भी बेहतरीन लो-एंड टॉर्क का साथ।
  • उपयोगी ग्राउंड क्लीयरेंस: 205 मिमी का क्लीयरेंस पत्थरों और नालों से गाड़ी को सुरक्षित रखता है।
  • लाजवाब माइलेज: इतने मुश्किल पहाड़ी रास्तों के बाद भी 17.1 KMPL का शानदार एवरेज।

जहाँ थोड़ा सुधार हो सकता था (Cons):

  • बड़ा साइज (Dimensions): तंग पहाड़ी मोड़ों पर इसका चौड़ा आकार थोड़ा एक्स्ट्रा ध्यान मांगता है।
  • इंफोटेनमेंट सॉफ्टवेयर: टचस्क्रीन का रिस्पॉन्स कभी-कभी थोड़ा धीमा महसूस होता है।
  • पियानो ब्लैक पैनल: इंटीरियर के ग्लॉसी पार्ट्स पर स्क्रैच और फिंगरप्रिंट्स जल्दी आते हैं।
  • सिटी माइलेज: भारी बम्पर-टू-बम्पर ट्रैफिक में इसका माइलेज काफी कम हो जाता है।

अंतिम फैसला (Autobaba Verdict)

ParameterRating out of 10My experience
हाईवे टूरिंग9.5 / 10कमाल की हाईवे स्टेबिलिटी
राइड कम्फर्ट9 / 10शानदार सस्पेंशन और भरपूर केबिन स्पेस
माउंटेन परफॉर्मेंस9 / 10Kryotec इंजन का टॉर्क पहाड़ों में बेहतरीन बैलेंस और पावर देता है।
फ्यूल एफिशिएंसी9 / 10 पहाड़ी रास्तों पर 17.1 KMPL काफी अच्छा है
टेक्नोलॉजी7.5 / 10फीचर्स से भरपूर है लेकिन टचस्क्रीन को थोड़ा और स्मूथ होता
OVERALL SCORE8.8 / 10हाईवे और पहाड़ों के लिए परफेक्ट

अंतिम राय

इस 1,406 किलोमीटर के सफर ने मुझे एक बात साफ़ समझा दी जो यह थी कि एक अच्छी टूरिंग SUV सिर्फ ताकतवर इंजन से नहीं बनती। जब लंबी दूरी पर सस्पेंशन भरोसा दे, हाईवे पर गाड़ी स्थिर रहे, पहाड़ों में इंजन आत्मविश्वास बनाए रखे और दिनभर की ड्राइव के बाद भी शरीर ज़्यादा थका हुआ महसूस न करे, तभी सफर सच में आसान लगता है।

मेरे लिए टाटा सफारी ने यही भरोसा दिया। इसकी कुछ छोटी कमियाँ ज़रूर हैं, लेकिन पूरे ट्रिप को देखते हुए वे अनुभव पर हावी नहीं होतीं। अगर आपको अक्सर हाईवे और पहाड़ी इलाकों में लंबी यात्राएँ करनी पड़ती हैं, तो यह SUV आज भी एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प साबित होती है।

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